मनसे महाधिवेशन : बदला ध्वज, राज के पुत्र अमित का राजनीतिक अवतार

मुम्बई। शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की जयन्ती के अवसर पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का महाधिवेशन आरम्भ कर राज ठाकरे ने स्वयं को बाला साहेब का असली राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने की नयी पहल आरम्भ कर दी है। यही नहीं, शिवसेना के हिन्दुत्व पर भी वह कब्जा करने की कवायद षुरू कर चुके हैं। उन्होंने महाधिवेशन के दौरान मनसे का नया केसरिया ध्वज लोकार्पित किया। साथ ही मंच पर वीर सावरकर का चित्र भी लगाया। सावरकर के अलावा मंच पर शिवाजी की मूर्ति, भीमराव अम्बेदकर और सावित्री बाई फुले के चित्र लगाये गये।

शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की जयंती के मौके पर बृहस्पतिवार, 23 जनवरी 2020 को राज ठाकरे की राजनीतिक पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) का महाधिवेशन आरम्भ हुआ। राज ठाकरे ने इस दौरान मनसे का नया ध्वज लोकार्पित किया। यह केसरिया रंग का जिसे भगवा रंग भी कहते हैं। पहले मनसे का ध्वज नीला, सफेद, केसरिया और हरे रंग का होता था।

काँग्रेस से समझौता कर महाराष्ट्र में सरकार बनाने और मुसलमान को शिवसेना का विधायक बनाने जैसे कार्यों के अलावा सावरकर और हिन्दुत्व जैसे मुद्दों को लेकर बैकफुट पर गयी शिवसेना को कड़ी टक्कर देने की तैयारी में हैं राज ठाकरे। एकदिवसीय महाधिवेशन में राज ठाकरे अपनी पत्नी शर्मिला और बेटे अमित ठाकरे के साथ षामिल हुए। इस दौरान उद्धव के बेटे और राज्य सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे को टक्कर देने के लिए राज ने अपने बेटे अमित राज ठाकरे को भी अधिवेशन के बीच में उपस्थित जनसमुदाय से परिचय कराया और उस के सक्रिय राजनीति में आने की घोषणा की।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का नया ध्वज पूरी तरह से केसरिया रंग का है। इस ध्वज पर छत्रपति शिवाजी के समय की राजमुद्रा भी प्रदर्शित की गयी है। 6 जून 1674 ईस्वी को राजगढ़ में राज्याभिषेक के बाद शिवाजी ने स्वयं यह राजमुद्रा तैयार की थी। इस राजमुद्रा पर संस्कृत में लिखा था- ‘‘प्रतिपच्चंद्रलेखेव वर्धिष्णुर्विश्ववंदिता शाहसुनोः शिवस्यैषा मुद्रा भद्राय राजते।’’ इस का अर्थ होता है- शाहजी के पुत्र शिवाजी की इस मुद्रा की महिमा उसी तरह से बढ़ेगी, जैसे पहले दिन (शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा के बाद) से चाँद बढ़ता है। यह विष्वभर में पूजी जायेगी और यह केवल प्रजा की भलाई के लिए चमकेगी।

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