नागरिकता कानून पर बोले मोदी : भारतीय संसद के विरुद्ध नहीं पाकिस्तान के खिलाफ आन्दोलन करें

लोग को सम्बोधित करते प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी

तुमकुर। भारत के प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने कर्नाटक के तुमकुर में बृहस्पतिवार, 2 जनवरी 2020 को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरुद्ध काँग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के हिंसात्मक आन्दोलन पर कहा कि काँग्रेस और उस के साथी दल देश की संसद के खिलाफ ही मैदान में उतरे हैं। प्रधानमन्त्री मोदी ने श्री सिद्धगंगा मठ में आयोजित कार्यक्रम में सन्त शिवकुमार स्वामी को श्रद्धाञ्जलि दी। उन्होंने कहा कि सन्तों के दिखाये मार्ग के कारण ही हम ने 21वीं सदी के तीसरे दशक में उम्मीद और उत्साह के साथ कदम रखे हैं। हम सभी को मालूम है कि बीते दशक की शुरुआत किस तरह के माहौल में हुई थी और अब क्या स्थिति है।
प्रधानमन्त्री ने कहा कि कुछ सप्ताह पहले ही हमारी संसद ने नागरिकता संशोधन कानून को मंजूरी देने का ऐतिहासिक काम किया है लेकिन काँग्रेस और उस के सहयोगी दल देश में संसद के खिलाफ ही आन्दोलन करने में जुटे हैं। उन्होंने सलाह देते हुए कहा- लोग पाकिस्तान से आये दलितों, पिछड़ों और प्रताड़ितों के खिलाफ ही आन्दोलन कर रहे हैं।
प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने कहा- पाक से आये हिंदुओं और उन में भी ज़्यादातर दलित लोगों को हम उन के नसीब पर नहीं छोड़ सकते। हमारा फर्ज़ है कि पाकिस्तान से आये सिख, जैन और ईसाई परिवारों की मदद करें। उन्होंने कहा कि जो लोग आज संसद के खिलाफ आन्दोलन कर रहे हैं, उन से कहना चाहता हूँ कि आज पाक को बेनकाब करने की ज़रूरत है। आन्दोलन करना ही है तो आप को पाकिस्तान के पिछले 70 सालों के कारनामों के खिलाफ करना चाहिये।
उन्होंने समझाया कि पाकिस्तान का जन्म धर्म के आधार पर हुआ था और तब से ही वहाँ दूसरे धर्मों के लोग के साथ अत्याचार शुरू हो गया था। समय के साथ पाकिस्तान में हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध और ईसाइयों पर लगातार अत्याचार बढ़ता रहा है। इसलिए लाखों लोग को अपने घर छोड़कर भारत आना पड़ा है। पाकिस्तान ने इन लोगों पर जुल्म किया लेकिन काँग्रेस और बाकी विपक्षी दल पाक के खिलाफ नहीं; बल्कि पीड़ितों के खिलाफ ही आन्दोलन कर रहे हैं। जिस पाकिस्तान ने वहाँ के अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किये उसे लेकर आखिर मुँह पर ताले क्यों लगे हुए हैं?

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