तीन तलाक निषेध विधेयक पर राष्ट्रपति का हस्ताक्षर, बना कानून

भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

नई दिल्ली। गाम्बिया दौरे से लौटने के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बृहस्पतिवार, 1 अगस्त 2019 को संसद से पारित बहुचर्चित ‘मुस्लिम महिला-विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2019’ पर हस्ताक्षर कर दिये। अब यह विधेयक कानून बन गया। इस कानून के तहत मुसलमान पुरुष अब पत्नी को तत्काल तीन तलाक नहीं दे सकते। तत्काल तलाक देना इस कानून के तहत अब अपराध हो गया है और इस के लिए सजा का भी प्रावधान है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार-2 के पहले संसदीय सत्र में अब तक 10 विधेयक पास हो गए। 17वीं लोकसभा और राज्यसभा में पास होने के बाद यह सभी विधेयक कोविंद के पास भेजे गए हैं। तीन तलाक बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है। बाकी 9 विधेयक भी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद कानून बन जायेंगे।
तीन तलाक कानून के तहत अब तीन तलाक देने के दोषी पुरुष को 3 साल की सजा सुनायी जा सकेगी। पीड़ित महिलाएँ अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारे-भत्ते की माँग कर सकेंगी।
‘मुस्लिम महिला-विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2019’ वास्तव में ‘तीन तलाक विधेयक’ के नाम से चर्चित है। मंगलवार, 30 जुलाई 2019 को राज्यसभा में पारित हो गया था। राज्यसभा में मतविभाजन के दौरान विधेयक के पक्ष में 99 और विरोध में 84 मत पड़े। विधेयक 25 जुलाई 2019 को लोकसभा से पारित हो चुका था।

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