कोरोना प्रभाव : रेपो दर में कटौती, किस्त देनदारी टली

भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास

नयी दिल्ली। नोवेल कोरोना विषाणु के संक्रमण को देखते हुए देशभर में लॉकडाउन की गयी है। इस कारण अर्थव्यवस्था को भारी आघात पहुँचा है। अर्थव्यवस्था को और अधिक हानि न हो, इस के लिए वित्त मंत्रालय के बाद अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बड़े कदम उठाये हैं।
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेपो दर, रिवर्स रेपो दर और नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में कटौती की घोषणा शुक्रवार, 27 मार्च 2020 को की। उन्होंने ऋणधारको के लिए भी राहत का ऐलान किया है।
रिजर्व बैंक ने रेपो दर में 0.75 प्रतिशत की कटौती की। कटौती के बाद रेपो दर 4.4 प्रतिशत पर आ गयी। इस से आनेवाले दिनों में ऋण सस्ता मिलेगा। आरबीआई ने कर्ज देने वाले सभी वित्तीय संस्थानों को सावधिक कर्ज की किस्तों की वसूली पर तीन महीने तक रोक की सलाह दी। गवर्नर ने कहा, कार्यशील पूंजी पर ब्याज भुगतान को टाले जाने को चूक नहीं माना जायेगा, इस से कर्जदार की रेटिंग (क्रेडिट हिस्ट्री) पर असर नहीं पड़ेगा।
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि रिवर्स रेपो दर में 0.90 प्रतिशत की कमी की गई है। इसी तरह सीआरआर में एक प्रतिशत की कटौती हुई। अब सीआरआर 3 प्रतिशत पर आ गया है। गवर्नर ने कहा, रेपो दर में कमी से कोरोना वायरस महामारी के आर्थिक प्रभाव से निपटने में मदद मिलेगी।
सीआरआर में कटौती, रेपो दर आधारित नीलामी समेत अन्य कदम से बैंकों के पास कर्ज देने के लिए अतिरिक्त 3.74 लाख करोड़ रुपये के बराबर अतिरिक्त नकद धन उपलब्ध होगा।
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि वित्तीय बाजार की स्थिरता और आर्थिक वृद्धि संभालने के लिए परंपरागत या लीक से हट कर, सभी प्रकार के विकल्प विकल्प खुले हैं।

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